साइनस को करें माइनस

कुछ लोगो को सर्दी –जुकाम की समस्या अक्सर रहती। इनमें से ज्यादातर मामल साइनोसाइटिस यानी साइनस के होते है। आखिर साइनस क्या हैॽ सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह है क्याॽ साइनस एक तरह से हमारी खोपड़ी में जमा खाली जगह है जिसे हम कैविटीज (खोखले छेद) के नाम से जानते हैं। यह हमारे सिर को हल्का बनाए रखने में मदद करती है। इन छेदों को ही साइनस कहते हैं। यदि इन छेदों में बलगम भर जाती हैं तो सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इस समस्या को ही साइनोसाइटिस कहते हैं। आम बोल-चाल की भाषा में हम इसे साइनस के नाम से जानते हैं। भारत में हर साल बढ़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आते हैं। या फिर यह भी कहा जाता है कि हर साल इसके नए मामले सामने आते हैं।

क्यो होता है साइनस

नाक की हड्डी का बढ़ जाना और तिरछा होना, सांस लेने में रूकावट, एलर्जी जैसे कई कारण है जो साइनस होने की वजह बनते हैं। कह सकते हैं कि किसी भी कारण से साइनस के संकरे प्रवेश मार्ग में अगर रूकावट आ जाती है तो साइनस होता है। इसके अतिरिक्त कई बार खोखले छेदों में बलगम भर जाता है जिसके कारण साइनस बंद हो जाते हैं। इन्फेक्शन के कारण साइनस की झिल्ली में सूजन आ जाती है। इस वजह से सिर , माथे, गालों और मुंह के ऊपर के जबड़ें में दर्द होने लगता है। साइनस खराब जीवन-शैली की वजह से नही होता लेकिन जो लोग फिल्ड जॉब में रहते हैं यानी जो ज्यादा समय प्रदूषण में रहते हैं उनको साइनस होने की संभावना अधिक होती हैं।

 

कैसे पता लगाएं कि आपको साइनस हैं

आमतौर पर जुकाम ठीक होने में अपना समय लेता ही है। यह ज्यादा से ज्यादा ठीक होने में एक हफ्ते का समय लेता है। हालांकि तीसरे चौथे दिन जुकाम की तीव्रता में कमी आ जाती है। लेकिन अगर जुकाम एक-दो दिन में ही बहते बहते रूक जाए या अपने आप ठीक हो जाता है तो हो सकता है कि जुकाम बाहर न निकलकर अंदर ही जम गया है जो आगे चलकर साइनस का रूप ले सकता है। यदि जुकाम एक हफ्ता रहे और अपना पूरा टाइम लेकर ही ठीक हो तो मरीज को आगे चलकर साइनस होने का खतरा नही होता क्योंकि बलगम आदि नाक के जरिए बाहर निकल जाता है।

साइनस के लक्षण

  • लगातार नाक बंद
  • नाक से सांस लेने में रूकावट
  • आवाज में बदलाव
  • बुखार और बेचैनी
  • सिर में दर्द
  • माथे पर दर्द रहना
  • नाक से पीला, सफेद, हरा कफ जमा होना और निकलना
  • माथे, और आंखों के निचले भाग व गले पर सूजन रहना
  • दांतो में दर्द
  • सूंघने और स्वाद की शक्ति कमजोर पड़ना
  • बालों का सफेद होना
  • त्वचा का रंग बदलना

 

साइनस के प्रकार

एक्यूट साइनसः-  एक्यूट साइनस अक्सर बैक्टिरियल इन्फेक्शन के कारण होता है और इसमें सांस की नली के ऊपरी हिस्से में इन्फेक्शन होता है। इस सर्दी लगने के लक्षण अचानक उभर आते है, जैसे नाक का जाम होना या उसका बहना और चेहरे में दर्द होना। यह अवस्था 8-10 दिन में भी ठीक नही होती बल्कि आमतौर पर महीने भर तक बनी रहती है। इसके इलाज के लिए एन्टीबैक्टीरिय दवाएं दी जाती है। ये साइनस के लक्षण को खत्म कर देती है।  नाक में सूजन कम करने के लिए नेजल ड्रॉप्स दी जाती है, लेकिन इसका उपयोग कम ही करना चाहिए। इसके ज्यादा उपयोग करने से नाक की भीतरी सतह पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दर्द से राहत के लिए पेन किलर दवाएं दी जाती है और इसमें स्टीम लेने से भी फायदा होता है।

रीक्यूरेंट साइनसः- अगर अस्थमा या एलर्जी से संबंधित कोई बिमारी है तो जल्दी-जल्दी क्रॉनिक साइनस हो सकता है। इसका इलाज करीब-करीब क्रॉनिक साइनस की तरह ही होता है।

क्रॉनिक साइनसः– इसमें लंबे समय तक साइनस में जलन व सूजन रहती है। सूजन दो तरह की होती है । एक, अचानक होती है और कुछ दिनों में चली जाती है। लेकिन कई मरीजों में सूजन लम्बी चलती है और साथ में नाक में दर्द भी होता है। इसमें नाक के रास्ते को साफ करना बेहद जरूरी होता है। किसी को साइनस की प्रोबलम कई वर्षों तक रहे तो यह अस्थमा में बदल सकती है।

सब-एक्यूट साइनसः– साइनस में चार से आठ हफ्ते तक सूजन और जलन रहती है। इसका इलाज भी लगभग एक्यूट साइनस की तरह है।

इन उपायों से बचाव

  • साइनस से पीड़ित व्यक्ति के लिए लगभग 25-30 सुबह की सैर करना फायदेमंद है। सुबह की ताजा ठंडी हवा साइनस के विकार को कम करने में सक्षम है।
  • एलर्जी से बचने के लिए बहुत ज्यादा भारी-भरकम और गद्देदार फर्नीचर से परहेज करें। अपने तकिये, बिस्तर इत्यादि की नियमित सफाई करें। परफ्यूम से दूर रहें।
  • अपने घर में वेंटिलेशन को बनाए रखें। जहां तक हो , खिड़कियां खोलकर हवा को आर-पार जाने दें।
  • जुकाम से संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें
  • विटामिन सी और ए युक्त आहार का सेवन करें जैसे आंवला, संतरा, नींबू, मौसमी, अनार इत्यादि विटामिन सी और ए युक्त फलों का सेवन करें। विटामिन सी और ए रोग-प्रतिरोधक क्षमता बड़ाने में सक्षम है। साथ ही रिच एंटीबायोटिक बन जाता है।
  • बहुत ज्यादा या बहुत कम तापमान में न रहें। तापमान में अचानक आने वाले बदलाव से बचें।
  • नमक के पानी से नाक की सफाई करें।
  • तनाव से दूर रहें। तनाव के कारण शरीर की रक्षा करने वाले सेल कमजोर पड़ जाते हैं।
  • रोजाना 8-10 गिलास पानी पिएं।
  • सुबह की चाय या गर्म पानी पिएं।
  • धूम्रपान से बचें। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति में साइनस की समस्या सबसे ज्यादा देखी गई है।

 

ऐसे होता है इलाज

स्टीम

बारी-बारी से नाक के नथुनों की सफाई करें । पानी उबालें और डॉक्टर द्वारा बती गई दवा को उसमें डालकर पंखे बंद कर कपड़ा ढककर नाक और मुंह से लम्बी-लम्बी सांस 8-10 मिनट तक लें। इसके बाद 20 मिनट तक हवा में न जाएं। सादे ताजा पानी से सांस लेना ज्यादा बेहतर है।

दवाएं

साइनस के उपचार के लिए दवाएँ लेना भी जरूरी होता है। लेकिन कोई भी दवा अपने डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। नाक में कोई भी स्प्रे डॉक्टर की सलाह के बिना न डालें।

 

कब आ सकती है ऑपरेशन की नौबत

  • फंगस या इन्फेक्शन ब्रेन तक पहुंच गया हो या आंखों पर दबाव डाल रहा हों।
  • जब नाक में मस्सा बन गया हों
  • सर में बहुत ज्यादा तेज दर्द हो और नींद डिस्टर्ब हो।

 

इन चीजों के सेवन से भी मिलता है लाभ

लाल मिर्चः– लाल मिर्च, मेक्सिकन तीखी मिर्च, काली मिर्च खाने से साइनस की समस्या से जल्दी राहत मिलती है क्योंकि यें बंद नाक को खोलने में कारगर हैं।

ड्राइफ्रूट्सः– ड्राई फ्रूट्स, बीजों और वेजिटेबल ऑयल में मौजूद विटामिन ई भी साइनस की समस्या को दूर करता है।

नारियल पानीः– नारियल पानी में मौजूद पोटेशियम शरीर को पूरी तरह से साफ कर देता है जिससे साइनस की समस्या भी खत्म होती है।

चिकन सूपः– चिकन-सूप में मौजूद अमीनो-एसिड सिस्टीन से नाक बहने लगती है, जो साइनस ठीक होने के संकेत हैं।

हरी सब्जियाँ – हरी पत्तेदार सब्जियाँ, टमाटर, संतरे और पीले फलों में मौजूद विटामिन ए भी साइनस में फायदा पहुंचाता हैं।

लहसुनः– लहसुन भी एक बेहतर उपचार है। इसमें मौजूद एलिसिन एंजाइम साइनस के बैक्टिरिया और वायरस को खत्म करता है। अदरक, लहसुन, दालचीनी, इलायची जैसे एंटीबायोटिक मसालों का सेवन करना फायदेमंद हैं।

गर्म चायः– रोज सुबह-शाम अदरक-तुलसी की गर्म चाय का सेवन लाभदायक है यह बंद नाक को खोलनें में कारगर है।

 

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