श्रावण मास का महत्व और कैसे करें महादेव को प्रसन्न।

आ गया श्रावण मास, कर लें भक्तों शिवजी को प्रसन्न।

श्रावण मास अर्थात सावन के महीनें को मासोत्तम मास कहा जाता है। श्रावण मास मनुष्यों में ही नही अपितु पशु-पक्षियों में भी एक नई चेतना का संचार करता है। यह मास धार्मिक आस्था में डूबा होता है। यह पूरा माह भगवान शंकर की आराधना के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि यदि शंकर जी को प्रसन्न करना हो, और उनसे अपनी मनोकामना सिद्ध करानी हो तो श्रावण में सच्चे हृदय से उनकी उपासना एवं व्रत करके अपनी इच्छा की पूर्ति की जा सकती है। इसका हर दिन पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण रहता है। धार्मिक परिदृश्य से श्रावण मास भगवान शंकर को ही समर्पित है।

हिंदु पांचाग के अनुसार सभी मासों को किसी न किसी देवता के साथ संबंधित देखा जा सकता है। वैसे ही श्रावण मास को भगवान शिवजी के साथ देखा जाता है। श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष महत्व होता है। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को श्रावण सोमवार भी कहा जाता है।

इस वर्ष 2017 में 10 जुलाई से श्रावण मास प्रारम्भ है। इस महीने में भागवत कथा और अनगिनत उत्सव मनाये जाते है। श्रद्धालु पूरे सावन के महीने में पवित्र जल से शिवलिंग पर जल चड़ाते हैं। दूध, दही, घी, शहद तथा बेल-पत्र से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। उत्तर भारत के विभिन्न प्रांतो से इस महीने शिवभक्त जन गंगाजल लेने अर्थात कांवड़ का पवित्र जल लेने हरिद्वार, काशी, गंगासागर और ऋषिकेश की यात्रा पैदल करके श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को अपने क्षेत्र के शिवमंदिर में शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, पुण्य अर्जित करते हैं।

जो व्यक्ति प्रतिदिन पूजन न कर सके उन्हे सोमवार को भगवान शंकर की पूजा अवश्य करनी चाहिए और व्रत रखना चाहिए। सोमवार भगवान भोलेनाथ का प्रिय दिन है, अतः सोमवार को शिवाराधना जरूर करनी चाहिए।

इस मास में लघुरूद्र, महारूद्र अथवा अतिरूद्र पाठ कराने का विधान हैं।

श्रावण मास के सोमवार व्रत पुरूष व स्त्रियां कोई भी कर सकता है। कुंवारी स्त्रियाँ इस व्रत को खासतौर पर अच्छे पति की कामना हेतु करती हैं। वैसे भगवान शंकर का यह व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है।

श्रावण सोमवार का महत्व

श्रावण सोमवार को रखे गए व्रत की महिमा अपरम्पार है। इसके पीछे भी एक कथा हैं।

कहा जाता है कि जब सती ने अपने पिता दक्ष के घर अपना शरीर त्याग दिया था उससे पूर्व सती ने हर जन्म में महादेव को पाने का प्रण किया था। पार्वती भगवान भोलेनाथ को पाने के लिए श्रावण के महीने में ही निराहार रहकर कठोर तप किया था और भगवान शंकर को पा लिया था। इसलिए इस माह का विशेष महत्व है। श्रावण मास में विवाह योग्य कन्या इच्छित वर पाने के लिए सावन के प्रत्येक सोमवार को उपवास करती हैं, इसमें भगवान भोलेनाथ के अलावा उनका परिवार अर्थात माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय और नंदी की भी पूजा की जाती है।

श्रावण मास में शिवलिंग पर जलाभिषेक का महत्व

इस संदर्भ में एक कथा बहुत प्रचलित है। ऋषि-मुनियों का कहना है कि समुंद्र मंथन भी श्रावण मास में हुआ था। जब देवताओं और राक्षसों ने अमृत पाने के लिए समुंद्र मंथन किया तो उस मंथन में मंज 14 प्रकार के तत्व निकले। जिसमें विष को छोड़कर सभी 13 तत्व देवताओँ और राक्षसों में वितरित हो गए। किंतु जब समुंद्र-मंथन में से विष निकला तो उसकी ज्वाला से समस्त ब्रह्मांड जलने लगा इस संकट से व्यथित हो समस्त देवगण और राक्षस गण भगवान शिव के पास गए और उनके समक्ष प्रार्थना करने लगे। तब सभी की प्रार्थना को सुनकर भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने हेतु उस विष का पान किया और इसे अपने कंठ में अवरूद्ध कर लिया। इसीलिए भगवान शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है। इसके बाद देवताओं ने भगवान शंकर को विष के संताप से बचाने के लिए उन्हे गंगा जल अर्पित किया। इसके बाद से ही शिव भक्त प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

कैसे करें श्रावण मास में सोमवार का व्रत

इस व्रत में प्रातःकाल पवित्र जल से विधिपूर्वक स्नान करके भगवान शंकर की पूजा करें। पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके, आसन पर बैठकर एक ओर पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर एवं गंगाजल) रख ले। शिव परिवार को पंचामृत से स्नान करायें। फिर चंदन, फल, रोली, सुगंध, वस्त्र और फूल आदि अर्पित करें।

शिवलिंग पर सफेद फूल, भांग, बेलपत्र, धतूरा, सफेद वस्त्र और मिष्ठान चढ़ाएं। गणेश जी को हरी घास, मोदक, एवं पीले वस्त्र अर्पित करें| भगवान शिव की आरती या शिव चालीसा का पाठ करें | गणेश जी की आरती धुप दीप से करें | श्रृद्धापूर्वक शिव परिवार से अपने परिवार की सुख समृधि के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना करे | भगवान शंकर की स्तुति दिन में दो बार की जाती है। सूर्योदय होने पर और सूर्यास्त होने के बाद। पूजा के दौरान 16 सोमवार की व्रत कथा और सावन व्रत कथा का पाठ किया जाता है। शिव मंत्र का जाप अत्यंत उपयोगी माना गया है अन्यथा आप ‘ऊँ नमः शिवाय’ और गणेश मंत्र ‘ऊँ गं गणपतये नमः का जाप करते हुए सामाग्री चढ़ा सकते हैं।

श्रावण मास में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए करें यह उपाय

  • श्रावण मास में शिव चालीसा और आरती का गायन करें
  • श्रावण मास में रूद्राक्ष पहनना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसलिए पूरे महीने रूद्राक्ष की माला धारण करें व जाप करें।
  • महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें
  • भगवान शिव को भभूती लगाएं। साथ ही अपने मस्तक पर भी लगाएँ।
    बेलपत्र, शहद, दूध और जल से शिवलिंग का अभिषेक करें
  • सोमवार को श्रद्धापूर्वक व्रत रखें। (यदि पूरे दिन व्रत करना संभव न हो तो सूर्यास्त के बाद एक समय भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

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